UNION GOVERNMENT : STRUCTURE OF STRONG GOVERNMENT 1950 (PART 1)

UNION GOVERNMENT

जब 26 जनवरी 1950 की तारीख तय हुई उसे दिन से भारत में संविधान लागू किया गया और उसे दिन को गणतंत्र दिवस के नाम से हम मानते हैं।

जब भारत 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था उसके बाद संविधान लागू करने के लिए भारत ने 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होगा यह तय किया था।

क्योंकि पहले राजे महाराजाओं की सत्ता थी , उसके बाद भारत पर कई देशों ने आकर राज किया।

जब 15 अगस्त 1947 को भारत पूरी तरह से आजाद हुआ तब भारत ने यह बात ठान ली के अब भारत मोनार्की नहीं बल्कि रिपब्लिक भारत होगा।

PARLIAMENTARY SYSTEM

{UNION GOVERNMENT} जब भारत में संविधान लागू करने की बात आई तब भारत ने संसदीय व्यवस्था को अपनाया है जिसे हम PARLIAMENTARY SYSTEM भी कहते हैं।

UNION GOVERNMENT

इसी पार्लिमेंट के तीन अंग होते हैं जिसे अपना अपना कार्य और अपनी अपनी पावर होती है।

  1. पहला पार्ट है Legislature जिसे हम विधाइका कहते हैं।
  2. दूसरा पाठ है Executive जैसे हम कार्यपालिका कहते हैं।
  3. और तीसरा होता है Judiciary जिसे हम न्यायपालिका कहते हैं।
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Legislature

  1. Legislature एक Law Making Body होती है, जो विधायिका का कार्य नए कानून बनाना और पुराने कानून में बदलाव करना यह Legislature का काम होता है। ( UNION GOVERNMENT)


अगर देश में कोई नया कानून बनता है या फिर कोई सरकार की तरफ से अगर GR निकलता है वह विधायिका (Legislature) बनाती है जो पूरे देश में लागू होता है।

Executive Body

2) कार्यपालिका (Executive Body ) का काम होता है विधायिका (Legislature) ने जो कानून बनाया है उस कानून को लागू करना।

Judiciary

3) तीसरा पार्ट है (Judiciary) जो न्यायपालिका के नाम से जाना जाता है।


न्यायपालिका का काम है जो विधायिका ने नए कानून बनाए हैं या फिर पुराने कुछ कानून में बदलाव किया है उसे नियमों का पालन अच्छे से हो रहा है या नहीं हो रहा है यह देखना न्यायपालिका का काम है।

अगर कोई अच्छे से नियमों को नहीं निभा रहा है तो उसको कानूनी तरीके से सजा देना भी न्यायपालिका का काम होता है।

केंद्र सरकार

विधायिका के दो भाग होते हैं उसमें से एक होता है केंद्र सरकार जो के पूरे देश के लिए लागू होता है और दूसरा होता है राज्य सरकार जो के हर एक राज्य के लिए लागू होता है। ( UNION GOVERNMENT )

UNION GOVERNMENT

केंद्र सरकार के नियम पूरे देश के लिए लागू होते हैं और राज्य सरकार के नियम जिस राज्य में जो सरकार है वह सरकार सिर्फ उसी राज्य को चला सकती है।

अगर देश के लिए कोई भी कानून बनाना होता है तो वह केंद्र सरकार बनाती है।
देश के लिए जहां पर कानून बनाए जाते हैं उस जगह को हम संसद ( Parliment) कहते हैं।

संसद में भी कानून बनाने के लिए दो हाउसेस होते हैं।
जिसमें से एक लोकसभा (Low House) होता है और दूसरा राज्यसभा (Upper House) होता है।

लोकसभा को हाउस आफ पीपल और राज्यसभा को काउंसिल ऑफ स्टेट कहा जाता है।

राज्य सरकार

राज्य सरकार के लिए यहां पर कानून बनते हैं उसे विधानमंडल कहते हैं।
विधानमंडल में भी कानून बनाने के लिए हाउसेस होते हैं जिसमें से एक होता है विधानसभा।

विधानसभा हर एक राज्य में होता है।
दूसरा होता है विधान परिषद ।
जरूरी नहीं है कि विधान परिषद हर जगह पर हो।

विधान परिषद

चलो हम देखते हैं कि किन-किन राज्यों के पास अपना विधानपरिषद है।

  1. महाराष्ट्र
  2. कर्नाटक
  3. उत्तर प्रदेश
  4. आंध्र प्रदेश
  5. बिहार
  6. तेलंगाना

हर एक स्टेट पर डिपेंड होता है कि वह विधान परिषद रखना चाहते हैं या नहीं। (UNION GOVERNMENT)


इस तरह से केंद्र और राज्य इन दोनों विभागों में बटी होती है विधायिका।

कार्यपालिका


कार्यपालिका (Executive Body ) भी इसी तरह से दो विभागों में बटी होती है, जिसमें से एक होता है केंद्र और दूसरा होता है राज्य।

केंद्र में सबसे ज्यादा महत्व होता है राष्ट्रपति को, उसके बाद होते हैं उपराष्ट्रपति, और फिर आते हैं पंतप्रधान।

पंतप्रधान के बाद आते हैं मंत्री परिषद और मंत्री परिषद में होते हैं कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री, और उप मंत्री। (UNION GOVERNMENT)


हमारे भारत के संविधान में सबसे ज्यादा पावर प्रधानमंत्री (प्राइम मिनिस्टर) के हाथ में दी गई है।

राज्य स्तर पर जो प्रमुख होते हैं उसको कहते हैं राज्यपाल , राज्यपाल के नीचे आते हैं मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री के बाद आते हैं मंत्री परिषद ।

हमारे राज्य में संविधान के अनुसार राज्य का कारोबार मुख्यमंत्री के हाथ में होता है।


और राज्य का कारभार मुख्यमंत्री अपने मंत्री परिषद के साथ मिलकर चलते हैं।

हमने ऊपर देखा है कि हर एक भाग बहुत सारे विभागों में बटा हुआ है इस तरह से हमारी न्यायपालिका भी तीन भाग में बटी हुई है। (UNION GOVERNMENT )

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JUDICIARY

1) सर्वोच्च न्यायालय (Supreme court)
2) उच्च न्यायालय (High court)
3) राज्य न्यायालय (District court)

सुप्रीम कोर्ट में जो फैसला सुनाते हैं उसे कहते हैं CJI – इसका मतलब है Chief Justice of India.

अगर देश पटरी पर या फिर देश में कोई भी मुकदमा चल रहा है तो उसे सॉल्व करने का काम सर्वोच्च न्यायालय करता है।

ऐसा नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ बड़े-बड़े ही मुकदमे लड़े जाते हैं अगर हमें जिला न्यायालय में न्याय नहीं मिला तो हम तो हम अपना मुकदमा हाई कोर्ट में ले जा सकते हैं। (UNION GOVERNMENT)


अगर हाई कोर्ट के बावजूद भी न्याय नहीं मिला तो हम सुप्रीम कोर्ट में अपने मुकदमे के लिए अपील कर सकते हैं।
भारत में कुल मिलाकर 25 हाई कोर्ट है जो के राज्य स्तर पर होते हैं।

उसके नीचे आता है जिला न्यायालय जिसे हम जिला न्यायालय के नाम से जानते हैं।

जिला न्यायालय में जिस जिले में न्यायालय है उस जिले के सभी मुकदमे जिला न्यायालय में याचिका पर जाते हैं।
और देश के सभी ज्यादा मुकदमे डिस्टिक कोर्ट में ही आते हैं।

हमारी न्यायपालिका की सबसे पहली सीढ़ी है जिला न्यायालय। अगर हमें लगे की जिला न्यायालय में हमारे साथ न्याय नहीं हुआ है तो हम हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं ।


अगर हाई कोर्ट में भी आपको लगे कि आपको हाई कोर्ट में भी न्याय नहीं मिला तो आप उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपना मुकदमा लड़ सकते हैं। (UNION GOVERNMENT)

FOR DETAILS : https://myentrance.in/government-of-india-structure-and-functions-a-complete-guide/

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