SALIENT FEATURES

लिखित संविधान (WRITTEN CONSTITUION)
भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज है। (SALIENT FEATURES)
भारत का संविधान एक लिखित स्वरूप में है जो की सात लोगों की फेडरल मीटिंग में बैठकर परिपूर्ण दस्तावेजों के साथ लिखा गया है।
परिभाषा: लिखित संविधान एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसमें देश के शासन, अधिकारों, नियमों और प्रक्रियाओं का स्पष्ट और विस्तृत वर्णन होता है।
विशेषताएं:
- यह एक ठोस और स्पष्ट दस्तावेज होता है।
- इसमें देश के शासन की मूल संरचना और कार्यप्रणाली का वर्णन होता है।
- इसमें नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों का उल्लेख होता है।
महत्व: लिखित संविधान होने से देश के शासन में स्थिरता और स्पष्टता आती है। यह न्यायपालिका को भी एक आधार देता है जिससे वे कानूनों की व्याख्या कर सकें।
लंबा और विस्तृत (LENGTHY & DETAIL)
यह दुनिया के सबसे लंबे लिखित संविधानों में से एक है। भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है क्योंकि भारतीय संविधान को लिखने के लिए 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे जिसको विस्तृत करने के लिए 251 पन्नों में लिखा गया है।
संघीय व्यवस्था (FEDERAL SYSTEM)
भारत में संघीय व्यवस्था है जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की शक्तियाँ परिभाषित हैं। भारत का संविधान एक संघीय व्यवस्था में लिखा गया है जिसमें केंद्र में और राज्यों में दोनों शक्तियां विभाजित की गई है जिसका उपयोग करके वह अपने-अपने राज्यों की सुरक्षा कर सकते हैं।
संसदीय प्रणाली (PARLIAMENTARY SYSTEM)
भारत में संसदीय प्रणाली अपनाई गई है।
मौलिक अधिकार (FUNDAMENTAL RIGTH)
संविधान में नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों का प्रावधान है।
हमारे भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों का बहुत ही अधिक मूल्य है इसको इतना प्रावधान दिया गया है के हर एक नागरिक को अपना जीवन जीने के लिए सभी मौलिक अधिकार सौंपे गए हैं।
नीति निर्देशक तत्व (DIRECTIVE PRINCIPLES OF STATE POLICY)
संविधान में नीति निर्देशक तत्वों का समावेश है जो राज्य को नीतियों के निर्माण में मार्गदर्शन करते हैं।
धर्मनिरपेक्षता (SECULARISM)
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हमारा भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जिसमें सभी धर्म को सर्वधर्म समभाव कहा गया है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता (INDEPENDENCE JUDICIARY)
न्यायपालिका स्वतंत्र है और कानून की व्याख्या करती है। भारतीय न्यायपालिका को इतना स्वतंत्र कर दिया गया है कि हर एक व्यक्ति के लिए कानूनी न्यायपालिका अपना समान अधिकार देगी।

INDIA TAKES SOME IDEAS
भारत में जब संविधान लिखने के लिए शुरुआत की उससे पहले हमने अपने कुछ मित्र देश से भारत का संविधान लिखने के लिए आइडिया ली थी।
चलो आगे देखते हैं किस देश से कौन सी बात हमने हमारे संविधान में ली है।
- United States of America : लिखित संविधान (Written Constitution) और मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
- United Kingdom: स्वतंत्रता के नियम (Rules of Law)
- France : स्वतंत्रता के मूल सिद्धांत (principles of Liberty)
- Germany: आपातकाल के दौरान के मूलभूत अधिकार (Fundamental Rights During An Emergency)
- Australia: संसद की बैठक (Sittings of Parliament)
UNITED STATES OF AMERICA (USA)
- WRITTEN CONSTITUTION
- FUNDAMENTAL RIGHTS ( BILL OF RIGHTS)
- JUDICIAL REVIEW
1) WRITTEN CONSTITUTION
लिखित संविधान एक ऐसा दस्तावेज होता है जिसे किसी सरकार को चलाने के लिए एक संविधान सभा तैयार की जाती है उसमें सरकार की संरचना, नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य का विस्तार उल्लेख एकदम बारीकी से लिखा होता है।
संविधान सभा द्वारा एक निश्चित तिथि पर इसे स्वीकार किया जाता है और जिस देश के लिए लिखा होता है उसको लागू किया जाता है।
जैसे हमारे भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 लागू किया गया था।
लिखित संविधान का मतलब होता है कि देश को चलाने के लिए जो भी अधिकारों कर्तव्यों का नागरिकों के स्वतंत्रता के लिए जो भी सरकार ने संरचना और कानून बनाए हैं उनको लिखित स्वरूप से विकसित किया जाता है और विशिष्ट रूप से संहिताबध्द रखा जाता है। preamble
भारत ने इसी लिखित संविधान का आदर्श यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका से सीखा है जिसको भारतीय संविधान में दस्तावेजों के लिए उपयुक्त माना है।
2) FUNDAMENTAL RIGHTS (Bill Of Rights)
मौलिक अधिकार का मतलब है कानूनी सुरक्षा के वह समूह है जिनमें सभी भारतीयों को संविधान के भाग 3 में लिखा गया है कि भारत में रहने वाले हर एक व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा की सुरक्षा दी जाएगी, वह हर एक व्यक्ति इसमें शामिल होगा जो कि भारत का रहीवासी होगा।
भारत के हर उस व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता मिलेगी जो भारत का रहीवासी होगा ताकि देश में सम्मान और स्वतंत्रता का वह आनंद ले सके।
अगर किसी अधिकार का उल्लंघन होता है तो उसे व्यक्ति को न्यायालय के प्रति शिक्षा भी समान अधिकार से ही होगी।
मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 (article 12 to 35) के अंतर्गत आते हैं।
6 मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
- समानता का अधिकार: (Article 14-18) (Right to Equality)
- स्वतंत्रता का अधिकार: ((Article 19-22) (Right to Freedom)
- शोषण के विरुद्ध अधिकार: ((Article 23-24) (Right Against Exploitation)
- धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार: ((Article 25-28) (Right to Freedom of Religion)
- सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार: ((Article 29-30) (Right to Freedom of Culture and Education)
- संवैधानिक उपचारों का अधिकार: ((Article 32) (Right to Constitutional Remedies)
1.समानता का अधिकार: (Article 14-18) (Right to Equality)
हमारे भारतीय संविधान में समानता का अधिकार आर्टिकल 14 से 18 के तहत सुरक्षित किया गया है।
हमारे समाज के मूलभूत अधिकारों में से एक अधिकार सामान्य का अधिकार है।
यह अधिकार सभी नागरिको को बिना किसी भेदभाव के समानता का आश्वासन देता है उसमें जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति है।
यह अधिकार सिर्फ न्याय और निष्पनता के लिए बढ़ावा नहीं देते बल्कि समाज में हर एक व्यक्ति को एकता और स्वावलंबी बनता है।

यह अधिकार सभी व्यक्तियों को कानून के समक्ष समानता, सार्वजनिक स्थानों पर सामान्य, रोजगार के अवसरों में समानता का अधिकार बहाल करता है।
यह अधिकार लोकतंत्र की नीव को मजबूत बनाता है।
समानता का अधिकार भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण अधिकार माना गया है क्योंकि यह मानवाधिकार है जो कि उसको पाना हर एक मानव का अधिकार है और यह प्राधिकार देता है कि सभी नागरिक समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
यह अधिकार सुनिश्चित करता है कि:
- सभी नागरिक समान हैं।
- जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
- कानून के समक्ष सभी समान हैं।
इस अधिकार का उद्देश्य समाज में समानता और न्याय को बढ़ावा देना है।

2. स्वतंत्रता का अधिकार: (Article 19-22) (Right to Freedom)
स्वतंत्रता का अधिकार
भारतीय संविधान में स्वतंत्रता का अधिकार सभी नागरिकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और मौलिक स्वतंत्रता को शामिल करता है।

स्वतंत्र स्वतंत्रता का अधिकार जिसमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांति से इकट्ठा होने का अधिकार, देश में स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार, संघ बनाने की स्वतंत्रता, पूरे देश में निवास का विकल्प, और किसी भी पेसे, व्यापार या व्यवसाय का अधिकार शामिल है।
यह अधिकार लोकतंत्र को दर्शाता है ।
क्योंकि लोकतंत्र है इसलिए हर एक व्यक्ति को अपना खुद का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
3. शोषण के विरुद्ध अधिकार: (Article 23-24) (Right Against Exploitation)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में लिखा गया है कि स्पष्ट रूप से मानव तस्करी और जबरन श्रम और बेरोजगार पर रोक लगाई है।
भारतीय संविधान में स्पष्ट अक्षरों में लिखा गया है कि बच्चों को 6 की उम्र से 14 साल तक फ्री एजुकेशन मिले और लेबर चाइल्ड पर रोक लगाई जाए क्योंकि बच्चों शिक्षा लेने का पूरा हक है और यह उनसे जो भी चलेगा उसे पर कार्रवाई होगी।

मानव तस्करी करना एक सबसे बड़ा अपराध माना गया है जिसका अनुरोध भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के अंदर आता है।
भारतीय संविधान में अनुच्छेद 23 शोषण के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा हुआ है, जो कि मानव तस्करी को और जबरन श्रम करने वालों पर रोक लगाता है।
इसका अनुरोध हमारी न्याय व्यवस्था करती है और अगर कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उन्हें दंडनीय अपराध के तहत जेल भेजा जाना पड़ता है।
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अनुच्छेद 23 के मुख्य बिंदु:
- मानव तस्करी पर रोक
- जबरन श्रम का निषेध
- उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान
5. सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार: (Article 29-30) (Right to Freedom of Culture and Education)
संस्कृति और शिक्षा का अधिकार भारतीय संविधान में एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जो नागरिकों को अपनी संस्कृति, भाषा और शिक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

इसके मुख्य बिंदु:
- संस्कृति का संरक्षण: अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी संस्कृति, भाषा और लिपि का संरक्षण करने का अधिकार।
- शिक्षा का अधिकार: सभी नागरिकों को शिक्षा का अधिकार, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के लिए।
- शैक्षिक संस्थानों की स्थापना: अल्पसंख्यक समुदायों को अपने शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और प्रबंधन करने का अधिकार।
यह अधिकार अनुच्छेद 29 और 30 में वर्णित है:
- अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
- अनुच्छेद 30: अल्पसंख्यक वर्गों को शिक्षा संस्थानों की स्थापना का अधिकार
इस अधिकार का उद्देश्य है कि सभी नागरिक अपनी संस्कृति और शिक्षा का संरक्षण और विकास कर सकें।
6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार: ((Article 32) (Right to Constitutional Remedies)
भारतीय संविधान में दो महत्वपूर्ण संविधानिक उपचार हैं:
- मौलिक अधिकारों का संरक्षण: संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों का संरक्षण।
- न्यायालय में अपील: उच्चतम न्यायालय (supreme court) और उच्च न्यायालयों ( high court) में अपील करने का अधिकार, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
इन उपचारों का उद्देश्य है कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हो और न्यायालयों द्वारा न्याय प्रदान किया जा सके।
UNITED KINGDOM
भारत के संविधान में यूनाइटेड किंगडम (यूके) से कई महत्वपूर्ण विचार लिए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख विचार हैं:
- संसदीय प्रणाली: भारत ने यूके से संसदीय प्रणाली को अपनाया है, जिसमें एक शक्तिशाली संसद होती है जो कानून बनाने और सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए जिम्मेदार होती है।
2. न्यायपालिका की स्वतंत्रता: यूके की तरह, भारत में भी न्यायपालिका स्वतंत्र है और कानून की व्याख्या करने और न्याय प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।
3.कानून का शासन: यूके की तरह, भारत में भी कानून का शासन है, जिसका अर्थ है कि सभी नागरिक कानून के अधीन हैं और कानून के सामने समान हैं।
4.स्पीकर की भूमिका: भारत की संसद में स्पीकर की भूमिका यूके से प्रेरित है, जो सदन की कार्यवाही को संचालित करने और नियमों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है।
इन विचारों को अपनाकर, भारत ने अपनी संविधानिक व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने का प्रयास किया है।
FRANCE
भारत के संविधान में फ्रांस से स्वतंत्रता और गणतंत्र के विचार लिए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख विचार हैं:
- गणतंत्र की अवधारणा: फ्रांस की तरह, भारत ने गणतंत्र की अवधारणा को अपनाया है, जिसमें राज्य का मुखिया एक निर्वाचित व्यक्ति होता है, न कि एक राजा या रानी।
- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व: फ्रांस की क्रांति के आदर्श “स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” ने भारत के संविधान में भी अपनी जगह बनाई है, जो समानता और न्याय के मूल्यों को बढ़ावा देता है।
- धर्मनिरपेक्षता: फ्रांस की तरह, भारत ने धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को अपनाया है, जिसमें राज्य किसी भी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देता है और सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता होती है।
इन विचारों को अपनाकर, भारत ने अपनी संविधानिक व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने का प्रयास किया है।
GERMANY
आपातकाल में मौलिक अधिकारों का निलंबन: भारतीय संविधान (अनुच्छेद 352 से 360) में आपातकालीन प्रावधान शामिल हैं, जो केंद्र सरकार को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करने के लिए आपातकाल घोषित करने की अनुमति देते हैं, जैसा कि जर्मनी के वाइमर संविधान के अनुच्छेद 48 में था.
भारत के संविधान में जर्मनी से कुछ महत्वपूर्ण विचार लिए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख विचार हैं:
- आपातकालीन प्रावधान: जर्मनी के वीमर संविधान से प्रेरित होकर, भारत ने आपातकालीन प्रावधानों को अपने संविधान में शामिल किया है, जो राष्ट्रीय आपातकाल, राज्य आपातकाल और वित्तीय आपातकाल के दौरान विशेष शक्तियों का प्रावधान करते हैं।
इन विचारों को अपनाकर, भारत ने अपनी संविधानिक व्यवस्था को मजबूत और प्रभावी बनाने का प्रयास किया है।
- NATIONAL EMERGENCY
- STATE EMERGENCY
- FINANCIAL EMERGENCY
1. NATIONAL EMERGENCY
राष्ट्रीय आपातकाल – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित की जाती है। यह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण खतरे की स्थिति में लगाई जाती है।
2. STATE EMERGENCY
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है जब राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है।
3. FINANCIAL EMERGENCY
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल लगाया जाता है जब देश की वित्तीय स्थिरता खतरे में होती है।
AUSTRALIA
समवर्ती सूची (Concurrent List) : ऑस्ट्रेलिया के संविधान से प्रेरित होकर, भारत ने समवर्ती सूची की अवधारणा को अपनाया है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों को कुछ विषयों पर कानून बनाने की शक्ति दी गई है।
समवर्ती सूची (कॉन्करेंट लिस्ट) में केंद्र और राज्य सरकारें दोनों को कानून बनाने का अधिकार होता है। इस सूची में शामिल कुछ विषय हैं:
- शिक्षा (Education) : केंद्र और राज्य दोनों शिक्षा पर कानून बना सकते हैं।
- वन (forest) : वन संबंधी विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
- ट्रेड यूनियन (united trade) : ट्रेड यूनियन संबंधी कानून बनाने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों को है।
- संसद की संयुक्त बैठक (Joint sitting of parliament): संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में किसी विधेयक पर मतभेद होने पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।
- व्यापार की स्वतंत्रता (Freedom of trade): संविधान में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता का प्रावधान है।
- संसदीय कार्यकाल (Parliamentary terms): लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष होता है, जबकि राज्यसभा के सदस्य 6 वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
ARTICLES 1 TO 360


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