PRESIDENT : VICE PRESIDENT POWERS AND FUNCTIONS 2025

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PRESIDENT (राष्ट्रपति)

राष्ट्रपति (PRESIDENT) राष्ट्रीय एकता के प्रतीक होते हैं।
राष्ट्रपति राष्ट्र के प्रमुख होते हैं।

  • भारतीय आर्मी का सर्वोच्च कमांडर या फिर कमांडर इन के भारत के राष्ट्रपति होते हैं।
  • राष्ट्रपति अपनी क्षमता में तीनों सशस्त्र बलों इंडियन आर्मी इंडियन एयर फोर्स और इंडियन नेवी के प्रमुख की नियुक्ति करते हैं।
  • इतना ही नहीं राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के अधीन युद्ध की घोषणा कर सकते हैं या शांति स्थापित कर सकते हैं।
  • अगर देश में सुरक्षा के प्रति खतरा महसूस हो तो राष्ट्रपति ही देश में आपातकाल की घोषणा करते हैं।
  • भारत के राष्ट्रपति (PRESIDENT ) राज्य के प्रमुख होते हैं और भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) हैं।
  • राष्ट्रपति की शक्तियाँ और कर्तव्यों का विवरण संविधान में दिया गया है।
  • राष्ट्रपति (PRESIDENT ) की भूमिका मुख्यतः औपचारिक (ceremonial) होती है, लेकिन कुछ शक्तियाँ और कार्य ऐसे हैं जो भारतीय सरकार के संचालन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत में राष्ट्रपति का पद सभी पदों से ऊपर होता है जिसे सर्वोच्च पद कहा जाता है ।
  • जैसे कि घर का कोई एक लीडर अपने पूरे घर का नेतृत्व करता है इस तरह से राष्ट्रपति एक ऐसी हस्ती है जो पूरे भारत देश का नेतृत्व करता है।
  • राष्ट्रपति ना ही सिर्फ सरकार के सबसे प्रमुख व्यक्ति होते हैं बल्कि राज्य के भी प्रमुख होते हैं।
  • जैसे घर का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के पास सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां होती है इस तरह भारत के राष्ट्रपति के पास भी बहुत सारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और कर्तव्य होते हैं।
president

राष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियाँ (POWERS OF PRESIDENT)

1) कार्यपालिका संबंधी शक्तियाँ (Executive Powers)

सरकार की सभी कार्यकारी शक्तियाँ राष्ट्रपति के नाम पर होती हैं और वे कानूनों और नीतियों को लागू करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

यह अनुच्छेद भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति की भूमिका और शक्तियों को दर्शाता है।

राष्ट्रपति (PRESIDENT) के कार्यकारी शक्तियों में सबसे महत्वपूर्ण शक्तियां हैं।
1) प्रधानमंत्री की नियुक्ति।
2) मंत्रियों की नियुक्ति।
3) संसद को बुलाना और सत्रावसान करना।
4) राज्यपालों की नियुक्ति।
5) लोकसभा को भंग करना।
6) अध्यादेश जारी करना।
7) राष्ट्रपति के पास और भी कई अन्य महत्वपूर्ण शक्तियां भी होती है जैसे की सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करना न्यायाधीशों को हटाना उनको पदक और सम्मान से पुरस्कृत करना।

2) नियुक्ति शक्तियाँ (APPOINTER)

राष्ट्रपति (PRESIDENT ) सरकारी उच्च पद के ऑफिसर्स की नियुक्ति करते हैं।
इतना ही नहीं तो प्राइम मिनिस्टर (प्रधानमंत्री) की नियुक्ति भी राष्ट्रपति करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज की नियुक्ति भी राष्ट्रपति ही करते हैं।
और राष्ट्रपति आर्म फोर्स के कमांडर होते हैं।

राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। प्रधानमंत्री सामान्यतः लोकसभा (संसद का निचला सदन) में बहुमत प्राप्त दल का नेता होता है।

राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) के अन्य सदस्यों की नियुक्ति करते हैं।


3) विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)

राष्ट्रपति (PRESIDENT) को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को बुलाने (summon) और स्थगित (prorogue) करने का अधिकार है।

राष्ट्रपति को लोकसभा को भंग (dissolve) करने का भी अधिकार है।

राष्ट्रपति ( PRESIDENT ) प्रत्येक आम चुनाव के बाद संसद के पहले सत्र में दोनों सदनों को संबोधित करते हैं।

राष्ट्रपति विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को कानून बनाने के लिए अपनी अनुमति (assent) देते हैं और उन्हें रोक सकते हैं या पुनर्विचार (reconsideration) के लिए वापस भेज सकते हैं।

राष्ट्रपति को देश की एकता का प्रतीक माना जाता है राष्ट्रपति की सबसे मुख्य भूमिका होती है कि वह देश के कॉन्स्टिट्यूशन की रक्षा करें और उसको बनाए रखें।

राष्ट्रपति सभी निर्णय स्वयं नहीं लेते हैं बल्कि वह प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद के साथ बैठकर इन सभी कामों को करते हैं।

4) वित्तीय शक्तियाँ (Financial Powers)

राष्ट्र के वित्त में राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जैसे के विधान मंडल के समक्ष वार्षिक बजट को सही तरह से प्रस्तुत करना।

राष्ट्रपति संसद के समक्ष वार्षिक बजट प्रस्तुत कराते हैं, और सामान्य चर्चा के बाद इसे पारित करवाते हैं।

वित्तीय शक्तियों में से राष्ट्रपति की यह एक मुख्य शक्ति है जो वार्षिक बजट प्रस्तुत करते हैं, धन विधेयक को पारित करने के लिए अनुमति देते हैं, वित्त आयोग का गठन करना मतलब आकस्मिक निधि के अग्रिम राशि की अनुमति देना और केंद्र और राज्यों के बीच में करोगे वितरण की सिफारिश करने के लिए वित्त आयोग का गठन करना शामिल है।

राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना कोई भी धन विधेयक संसद में पेश नहीं किया जा सकता है।

राष्ट्रपति (PRESIDENT) हर साल संसद के समक्ष आर्थिक बजट प्रस्तुत करते हैं जिसे वार्षिक वित्तीय विवरण भी कहा जाता है।

राष्ट्रपति वित्त गठन का आयोग हर 5 साल में से एक बार कर सकते हैं।
केंद्र और राज्य के बीच में जो करो का वितरण कि सिफारिश करता है ।

5) सैन्य शक्तियाँ (Military Powers)

राष्ट्रपति (PRESIDENT )भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सेनापति होते हैं, और सभी सैन्य आदेश उनके नाम से जारी किए जाते हैं (अनुच्छेद 53)।

देश में अगर कोई युद्ध या फिर शीत युद्ध होता है तो उसे डिक्लेअर करने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास है ।

राष्ट्रपति की सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में सबसे बड़ी भूमिका होती है।

राष्ट्रपति सेवा के पदों के अनुसार सबसे बड़े पद पर बैठने वाले सर्वोच्च कमांडर होते हैं।

भारतीय थल सी नौसेना और वायु सेवा के कमान औपचारिक रूप से संभालने का अधिकार और राष्ट्रपति को है।

देश की सुरक्षा के लिए सभी सैनिकों की तैयारी के लिए प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री की तरफ से राष्ट्रपति को नियमित रूप से जानकारी प्राप्त होती रहती है।

राष्ट्रपति(PRESIDENT )के पास सशस्त्र बानो आर्म्ड फोर्स के जवानों का अधिकारों के लिए वीरता और बहादुर्ता के लिए परम चक्र, मिलिट्री सम्मान, महावीर चक्र और वीर चक्र पुरस्कार देने का अधिकार है।

6) न्यायिक शक्तियाँ (Judicial Powers)

1) क्षमा
राष्ट्रपति के पास कुछ ऐसी शक्तियां होती है जिसके आगे न्यायिक व्यवस्था भी शांत हो जाती है उसमें से एक है दोषी ठहराए गए व्यक्ति को क्षमा या फिर रहता की छूट देने का अधिकार।

इस शक्ति का प्रयोग कुछ असाधारण मामलों में ही किया जाता है जब न्याय और दया की आवश्यकता होती है तभी असाधारण मामलों में राष्ट्रपति के पास क्षमा याचना के लिए यह अपील की जाती हैं।

2) सजा में बदलाव
यदि किसी व्यक्ति को बहुत ही गंभीर सजा दी जाती है जिसका क्राइम इतना बड़ा हो ही नहीं और सजा इतनी गंभीर तरीके से दी जाती है तब इस शक्ति का प्रयोग राष्ट्रपति उनकी सजा कम या फिर सजा में बदलाव करने के लिए कर सकते हैं।


उदाहरण – अगर किसी व्यक्ति को छोटी सजा के लिए मृत्युदंड की सजा दी जाती है तब किसी भी देश के राष्ट्रपति उसे सजा में बदलाव करने की शक्ति रखते हैं उसे सजा को आजीवन कारावास में बदल सकते हैं और फांसी की सजा में बदलाव कर सकते हैं।

राष्ट्रपति के पास न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई भी अधिकार नहीं है परंतु केवल असाधारण परिस्थितियों में दया , राहत या फिर सजा में बदलाव करने की शक्तियां राष्ट्रपति के पास होती है।

राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वे किसी अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को माफ (pardon), स्थगित (reprieve), कम (respite) या समाप्त (remit) कर सकते हैं, अथवा किसी सजा को घटा सकते हैं (commute) (अनुच्छेद 72)।

भारत के राष्ट्रपति लोकतंत्र के संरक्षण रूप में भी कार्य करते हैं इसका अर्थ यह होता है कि सरकार न्याय पूर्ण तरीके से कम कर रही है या नहीं उसके पास संसद द्वारा पारित कानून को मंजूर करने की शक्ति दी गई है और अगर वह उसका सदुपयोग ना करें तो उन शक्तियों को वापस लेने का अधिकार भी राष्ट्रपति के पास है।

7) आपातकालीन शक्तियाँ (Emergency Powers)

राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं यदि उन्हें यह संतोष हो कि भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा पर गंभीर खतरा है — चाहे वह युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण हो (अनुच्छेद 352 से 360 तक)।

राष्ट्रपति के पास इमरजेंसी कंडीशंस में निर्णय लेने की शक्तियां है। इन शक्तियों का इस्तेमाल और राष्ट्रपति शांति स्थिरता और सुरक्षा बनाने के लिए प्रयोग करते हैं।

भारत में तीन प्रकार की आपातकालीन स्थितियां है।

1) राष्ट्रीय आपातकाल


यदि अगर दो देशों में किसी प्रकार के करण युद्ध या फिर एक्सटर्नल अग्रेशन होता है तो पूरे देश में खतरा आने के कारण राष्ट्रपति आपातकाल और नेशनल इमरजेंसी की घोषणा कर देते हैं जिसमें राज्य के शासन को संभालने और कुछ मौलिक अधिकारों को निलंबित करने की शक्तियां शामिल होती है।

2) राज्य आपातकाल


भारत में अगर यदि किसी राज्य में कानूनी व्यवस्था सही से नहीं चल रही हो और उसे राज्य की सरकार की स्थिति उसे राज्य को संभालने लायक ना हो तब उसे व्यवस्था को संभालने में वह राज्य सरकार असमर्थ होती है उसे वक्त पर राष्ट्रपति राज्य आपातकाल स्टेट एमरजैंसी की घोषणा कर देते हैं जिसके दौरान वह राज्य में शांति और व्यवस्था बनाने के लिए राष्ट्रपति को यह नियम लगाने पड़ते हैं।

3) वित्तीय आपातकाल


देश में अगर आर्थिक स्थिति आने का खतरा मंडराने लगता है तब इस गंभीर व्यवस्था को संभालने के लिए राष्ट्रपति फाइनेंशियल क्राइसिस के दम पर फाइनेंशियल एमरजैंसी की घोषणा कर देते हैं जिसमें राष्ट्रपति को देश के वित्त पर नियंत्रण और मुश्किल परिस्थिति को संभालने का अधिकार होता है।

संसद में विधायक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा(प्रायर रिकमेंडेशन) के साथ ही प्रस्तुत किया जाता है।
भारत के राष्ट्रपति संसद के समक्ष वार्षिक विवरण मतलब एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट अर्थात केंद्रीय बजट प्रस्तुत करवाते हैं।

राष्ट्रपति की सिग्नेचर के बिना कोई भी बिल पास नहीं किया जा सकता है।

राष्ट्रपति भारत की आकस्मिकता निधि मतलब कंटीन्जेंसीज फंड आफ इंडिया से किसी भी अप्रत्याशित को पूरा करने के लिए अग्रिम राशि जारी कर सकते हैं।

भारत के राष्ट्रपति हर 5 साल में एक वित्त आयोग मतलब फाइनेंस कमीशन का गठन करते हैं जो केंद्र और राज्य के बीच में राजस्व के वितरण की अनुशंसा करता है।

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भारत के राष्ट्रपति की द्वैध भूमिका (Dual Role of the President):

1. राज्य के औपचारिक प्रमुख (Ceremonial Head of the State):

राष्ट्रीय एकता का प्रतीक

राष्ट्रपति भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक होते हैं। राज्य के औपचारिक प्रमुख के रूप में वे विभिन्न सरकारी समारोहों, कार्यक्रमों और आयोजनों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

राजनयिक भूमिका (Diplomatic Protocol)

राष्ट्रपति विदेशी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हैं, राजदूतों से परिचय पत्र स्वीकार करते हैं और विदेश यात्राओं पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन गतिविधियों से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और संबंधों को मजबूती मिलती है।

2. संविधान के संरक्षक (Guardian of the Constitution):

विधेयकों पर स्वीकृति (Assent to Legislation)

राष्ट्रपति संसद द्वारा पारित विधेयकों पर अपनी स्वीकृति देते हैं। कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रपति विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं या स्वीकृति देने से इंकार कर सकते हैं, यदि उन्हें लगता है कि वह संविधान का उल्लंघन कर सकता है। इस प्रकार वे संविधान की रक्षा और उसकी गरिमा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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VICE PRESIDENT (उपराष्ट्रपति)

राज्यसभा के सभापति

उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं।

कार्यवाहक राष्ट्रपति

जब राष्ट्रपति अनुपस्थित होते हैं या अपने कार्यों को नहीं कर सकते, तो उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।

राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन

उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कार्यों को तब तक संभालते हैं जब तक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता।

उपराष्ट्रपति की शक्तियाँ (POWERS OF VICE PRESIDENT)

कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में

उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों को संभालते हैं।

अगर राष्ट्रपति किसी करण अपने कर्तव्य पर हाजिर नहीं हो सकते तब उस समय उपराष्ट्रपति उनकी जगह पर उनके काम काज देखते हैं।

राज्यसभा के सभापति के रूप में

उपराष्ट्रपति राज्यसभा की कार्यवाही को संचालित करते हैं।

राज्यसभा सदस्यों के अधिकारों की रक्षा

उपराष्ट्रपति राज्यसभा सदस्यों के विशेषाधिकारों और अधिकारों की रक्षा करते हैं।

  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं।
  • राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं।
  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा सदस्यों के अधिकारों और विशेषाधिकारों की रक्षा करते हैं।

अगर राष्ट्रपति किसी करण 6 महीने तक उनके पद पर विराजमान ना हो सके तब तक उपराष्ट्रपति उनकी जगह पर बैठकर राष्ट्रपति का पदभार संभालते हैं।

उपराष्ट्रपति जब राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठे हैं तब उपराष्ट्रपति को वह सभी अधिकार होते हैं जो के एक राष्ट्रपति को होते हैं।

जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की विशेष अधिकार को संभालते हैं तब राष्ट्रपति की सभी सेवाओं का वह चयन कर सकते हैं।

राष्ट्रपति को जो भी अलाउंस मिलते हैं वह अलाउंस उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में मिलते हैं क्योंकि वह विशेष अधिकार राष्ट्रपति को गवर्नमेंट ने दिए हैं और यही अधिकार अगर राष्ट्रपति किसी कारणवश ना ले सके तो उनकी जगह पर बैठकर उपराष्ट्रपति यह सभी विशेष अधिकार ले सकते हैं।

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