PREAMBLE : SOUL OF CONSTITUTION 1947

Preamble Is a Soul Of Indian Constitution.

PREAMBLE ( संविधान की प्रस्थावना )

PREAMBLE

“हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी , पंथनिरपेक्ष,लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा
इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”
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स्वतंत्रता पूर्व भारत

भारत 1757 से ब्रिटिशों के विरासत में था।

PREAMBLE


जब पहला और दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ (1945) उसके बाद भारत में संविधान लिखने की घोषणा की गई। preamble


दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद जब 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र होने के पश्चात संविधान सभा की घोषणा की गई ।


संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1947 से संविधान लिखने के लिए आरंभ कर दिया था।

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संविधान सभा के लिए जो सदस्य चुने गए थे वह निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे।


जिसमें डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर को वेस्ट बंगाल से चुना गया था।

भारतीय संविधान सभा का चुनाव भारतीय संविधान की रचना करने के लिए किया गया था।

संविधान 26 जनवरी 1947 को ही क्यों लागू किया ?

कोई और तारीख पर क्यों नहीं लागू किया गया ?

PREAMBLE


जब भारत पर ब्रिटिश का राज था तब भारतवासियों ने ब्रिटिश के पास भारत को स्वतंत्र करने की मांग की गई थी।


तब पंडित जवाहरलाल नेहरू 26 जनवरी 1930 को ब्रिटिश सरकार के आगे यह प्रस्ताव रखा था कि भारत को ब्रिटिश से आजादी चाहिए। preamble


तब ब्रिटिश सरकार ने यह प्रस्ताव खारिज करके सरदार वल्लभभाई पटेल को कहा कि हम तुम्हें तुम्हारा खुद का संविधान लिखकर देंगे जिसमें बहुत बड़े नियमों का दस्तावेज होगा और वह पूरा होने के बाद तुम्हें सौंप दिया जाएगा।

लेकिन तब यह बात किसी भी भारतीयों को मंजूर नहीं थी क्योंकि भारत हमारा देश है और उस पर तो ब्रिटिश राज कर रहे हैं जब हमारा भारत हमारा है तब संविधान में नियम किसी और के कैसे होंगे। preamble

भारत वासियों का कहना था कि जब देश हमारा है तो संविधान भी हमारे ही नियमों से बनेगा।
इसलिए संविधान लिखने में देर लगाई लेकिन किसी और का हस्तक्षेप हमें संविधान में मंजूर नहीं था।

और आखिरकार वैसे ही हुआ भारत का संविधान लिखने में बाहरी किसी भी व्यक्ति का कोई भी हाथ नहीं है संविधान पूरी तरह से ओरिजिनल है किसी और संविधान की कॉपी नहीं है।


इस वजह से 26 जनवरी 1930 कि वह तारीख आज भी हर भारतीयों को याद होनी चाहिए।
क्योंकि हमारे देश में ही, हमारे देश को स्वतंत्र होने के लिए हमने ही ब्रिटिश सरकार के आगे प्रस्ताव रखा था कि हमें आपसे आजादी चाहिए।

सच माने तो यह बात बड़े ही दुख की बात थी कि हम खुद के ही घर में खुद की आजादी के लिए किसी और के सामने हाथ फैला रहे थे।

इसलिए 20 सालों के बाद भी 26 जनवरी ही तारीख रखी गई।

14 August 1947 Black Day for India

जब सभी भारतीयों को यह बात समझ आने लगी कि अब हमें मांगने से स्वतंत्रता नहीं मिलेगी।
तब हर भारतीय का स्वतंत्रता की और कदम बढ़ने लगा।


जब भारत में 14 अगस्त 1947 का काला दिन देखा गया तब जाकर भारत को स्वतंत्रता मिली।


क्या हुआ था 14 अगस्त 1947 को ? preamble
1947 का यह दिन भारत के इतिहास में काला दिन माना जाता है।

क्योंकि 14 अगस्त 1947 को भारत का आधा हिस्सा भारत से अलग हो गया था।
भारतीयों के भाई-बहन मां-बाप उनसे बिछड़ कर अलग हो गए थे।


सीधे-सीधे कहे तो भारत का दो हिस्सों में बंटवारा हो गया था।

बंगाल एक समय पर भारत का हिस्सा हुआ करता था वही स्वतंत्रता के बंटवारे में भारत से अलग हो गया था।

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यह वह बंगाल है जहां से डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान लिखने के लिए चुनाव हुआ था।
और हमें स्वतंत्रता पाने के लिए भारत के इसी हिस्से को खोना पड़ा।

कोन है ये पाकिस्तान ?

14 अगस्त 1947 को जब भारत के टुकड़े हुए तब उसमें से भारत की छाती पर एक लकीर खींची गई जिसका नाम पाकिस्तान रख दिया गया।

लोग कहते हैं कि 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्र दिन है, लेकिन ऐसा नहीं है।

14 अगस्त को पाकिस्तान भारत से अलग किया हुआ एक भारत का एक हिस्सा है।

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visit the page: https://www.instagram.com/constitution_simplified?igsh=MWs3ZHBqdjRmbzN6Nw==


जब भारत को स्वतंत्रता मिलने के लिए मोहिमे में चल रही थी तब हम इन बटवारे के हिस्से को बचा नहीं पाए। preamble


14 अगस्त की दोपहर को महात्मा गांधी ने कोलकाता में भारतीयों को अनुरोध किया था कि हमें 14 अगस्त 1947 की आधी रात के बाद स्वतंत्रता मिलेगी लेकिन यह 14 अगस्त 1947 का जो दिन है वह इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों से लिखा जाएगा।


क्योंकि इस बंटवारे में न जाने हमारे कितने भाई बहन पाकिस्तान के साथ बाटे जाएंगे।

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उस दिन लगभग 10 लाख से भी ज्यादा कत्तल हुई थी।


न जाने कितने सारे हिंदू सिख लोगों को उसे दिन काटा गया था।

भारत को स्वतंत्रता मिलने में जो लोगों ने उसे दिन अपनी जान गवाई थी भारत हमेशा के लिए उनका कर्जदार रहेगा।

visit history:14 AUGUST 1947: ”PARTITION’S BLOOD WITH  DARK LEGACY

FLASH BACK OF HISTORY

अभी हमारे भारत का जो तिरंगा फहरा रहा है वह पिंगली वेंकैया इन्होंने डिजाइन किया था और 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में इसको लागू किया था।


भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान ( Written Constitution ) है।
जब भारत का संविधान लिखा गया था तब उसमें 395 आर्टिकल (अनुच्छेद) 22 पार्ट (भाग) और 8 शेड्यूल (अनुसूची) थे।

अब की तारीख में

448 आर्टिकल्स

25 पार्ट्स और

12 शेड्यूल है।


जब भारत का संविधान लिखकर तैयार हुआ था तब उसको लिखने के लिए 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे।

भारत का संविधान कुल 251 पन्नों का है।


मसूदा समिति (Drafting committee) 29 अगस्त 1947 को बनी थी। जिसके अध्यक्ष डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर थे।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर वेस्ट बंगाल से ड्राफ्टिंग कमेटी के लिए चुने गए थे।

Members of Drafting Committee

  • डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर
  • एन. गोपालस्वामी आयंगर
  • अलादी कृष्ण स्वामी अय्यर
  • कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशी
  • सैयद मोहम्मद सादुल्लाह
  • एन. माधव राव
  • डी.पी. खैतान

ड्राफ्टिंग कमेटी की स्थापना फॉर्मल डॉक्यूमेंट बनाने के लिए की गई थी जिसको ग्रुप ऑफ पीपल्स के नाम से भी जाना जाता है।

भारत का संविधान लिखने वाला ओरिजिनल व्यक्तिमत्व प्रेम बिहारी नारायण रायजादा है। इन्होंने भारत का संविधान अपने हाथ से पांडुलिपि में लिखा था उसके बाद उसको इंग्लिश भाषा में परिवर्तित किया था।

  • स्वतंत्र भारत के सबसे पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद थे।
  • संविधान सभा के कुल 399 मेंबर्स थे लेकिन जब भारत पाकिस्तान अलग-अलग हो गए जिसकी वजह से 299 मेंबर रह गए। preamble
  1. डॉ सच्चिदानंद सिन्हा भारत की संविधान सभा के पहले राष्ट्रपति थे उसके बाद में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद इनको चुना गया था।
  2. भारतीय संविधान के पन्नों को जिन्होंने अपनी कलाकुर्ती से सजाया (डिजाइन) था वह शांतिनिकेतन के विद्यार्थी ब्योहर राम मनोहर सिंन्हा और नंदलाल बोस थे।
  3. शांतिनिकेतन रविंद्र नाथ टैगोर गुरुकुल है। जिसको अभी विश्वविद्यालय के नाम से भी जाना जाता है।


भारतीय संविधान के कुछ ऐसे भाग है जो हमारे भारत को संविधान में दर्शाते हैं।

  • भाग 1: वेदिक काल –भारतीय सभ्यता को दर्शाता है
  • भाग 2 : महाभारत में कुरुक्षेत्र की लड़ाई को दर्शाता है।
  • भाग 3: भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण जी अयोध्या में वापस आए तब का दृश्य दर्शाता है।
  • भाग 4: गौतम बुद्ध– शांति, करुणा और ज्ञान के प्रतीक हैं यह दर्शाता है।
  • भाग5: महावीर जैन शांति और सत्यता के प्रतीक है यह दर्शाता है।
  • भाग 6: राजा अकबर– समृद्ध इतिहास और प्रशासन को दर्शाता है।
  • पार्ट 7: छत्रपति शिवाजी महाराज – हिंदवी स्वराज, मजबूत अनुशासन, अपने लोगों के साथ न्याय और समानता के प्रतीक को दर्शाता है।
  • भाग 8 : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी – शांति और अहिंसा को दर्शाता है।
  • भाग 9 : औद्योगिकरण –व्यक्तिवाद का उदय, वैज्ञानिक और तर्कसंगत सोच का विकास, औद्योगीकरण और पूंजीवाद का विस्तार, आधुनिकिकरण को दर्शाता है। preamble

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