COUNCILE OF MINISTERS
COUNCILE OF MINISTERS में पंतप्रधान के साथ-साथ अन्य मंत्रियों का एक समूह होता हैI
जो राष्ट्रपति को सलाह देने और शासन चलाने के लिए जिम्मेदार होता है।

भारतीय मंत्री परिषद में कुल मिलाकर 72 मेंबर्स होते हैं जिसमें पंतप्रधान भी एक मंत्री के रूप से बैठते हैं।
- केबिनेट मिनिस्टर्स 30 होते हैं,
- मिनिस्टर्स ऑफ़ स्टेट 36 होते हैं,
- मिनिस्टर्स ऑफ़ स्टेट की इंडिपेंडेंट चार्ज 05 होते हैं।
पंतप्रधान मंत्री परिषद के हेड होते हैं।
इस COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) में कैबिनेट मंत्री राज्य मंत्री उप मंत्री का सहभागी होता है।
सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति यह उत्तरदाई होता है यह सरकार का सर्वोच्च कार्यकारी अंग होता है।
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्रिपरिषद) में जितने भी मंत्री बैठते हैं वह मंत्रालय को संभालते हैं।
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है।
यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो सबसे पहले सभी मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ता है।
राष्ट्रपति को सलाह या फिर सहायता देने के लिए मंत्री परिषद की स्थापना की गई हैI
यह अनुच्छेद 74 के तहत आता है इसके साथ-साथ अनुच्छेद 75 कहता है कि प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति पंतप्रधान मंत्री की सलाह पर होती है।
भारत की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में परिषद की अध्यक्षता कर रहे हैं यह 71 सदस्य है।
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैI
1) कैबिनेट मंत्री
2) राज्य मंत्री जिसे “मिनिस्टर्स आफ स्टेट्स” के नाम से जाना जाता हैI
3) डेप्युटी मिनिस्टर्स जिसे उप मंत्री कहते हैं।
1) कैबिनेट मंत्री (Cabinet minister )
कैबिनेट मंत्री यह सबसे वरिष्ठ और महत्वपूर्ण मंत्री जाने जाते हैं।
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) के नाम पर निर्णय लेने और नीतियों का निर्माण करने की सबसे बड़ी और मुख्य भूमिका निभाते हैं।
केबिनेट मिनिस्टर्स में प्रमुख मंत्रालय का नेतृत्व करते हैं उदाहरण मंत्रालय वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय।
2) राज्य मंत्री (Ministers of State)
स्वतंत्र प्रभार इंडिपेंडेंट चार्ज वाले राज्य मंत्री होते हैं जिन मंत्रियों को अलग अधिकार दिए होते हैं।
यह छोटे मंत्रालय के प्रमुख होते हैं और कैबिनेट बैठकों में विशेष रूप से निमंत्रण कर कर इन्हें शामिल किया जाता है।
3) उप मंत्री (Deputy Ministers)
इनके पास कोई विभाग नहीं होता और यह वरिष्ठ मंत्रियों के अधीन कार्य करते हैं जिसकी वजह से इन्हें उप मंत्री कहा जाता है।
यह कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को उनके प्रशंसक किया राजनीतिक और संसदीय कार्यों में विशेष प्रकार की सहायता करते हैं।
यह COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) इन तीन डिपार्टमेंट से मिलकर बनी हुई है जिसके हेड प्रधानमंत्री होते हैं जो की सबसे ऊपर होते हैं।
इन सभी मंत्रियों में उनके पदक्रम के आधार पर वेतन निर्भर होता है।
Visit The Page for More Information:LOKSABHA AND RAJYASABHA :AUTHORITY OF 2 HOUSES
ROLLS AND RESPONSIBILITY
- मंत्री परिषद के मंत्रियों को लॉस तैयार करना जिसको मेकिंग पॉलिसीज और मेकिंग ऑफ लॉस के नाम से जाना जाता है उसको इंप्लीमेंट करने का काम और हेड ऑफ द स्टेट को एडवाइस करने का काम होता है।
- गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट को कंट्रोल करने का एक सबसे बड़ा काम मंत्री परिषद का होता है।
- बजट के लिए प्रिपरेशन करना।
- मंत्री परिषद में विदाई एजेंडा प्रतिबंध करने का काम मंत्री परिषद के मंत्रियों का होता है।
- मंत्री परिषद कि मंत्रियों का काम होता है कि बाकी सभी कैबिनेट मिनिस्टर्स की मदद करना।
Ministers Of State (With Independent Charge)
- मंत्रिपरिषद में कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री होते हैं।
- राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार वाले भी हो सकते हैं।
- मंत्रियों को लोकसभा का सदस्य होना आवश्यक है।
- अगर वे लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, तो उन्हें नियुक्ति के छह महीने के भीतर किसी भी सदन का सदस्य बनना होगा।
- अनुभवी सांसदों को कैबिनेट मंत्री बनाया जाता है।
- कैबिनेट मंत्री सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं और उनके विभाग की पूरी जिम्मेदारी उन पर होती है।
- कैबिनेट मंत्रियों के लिए कैबिनेट की बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना आवश्यक है।
- कैबिनेट की बैठकों में सरकार महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
कैबिनेट मंत्रियों की अपने मंत्रालय के लिए पूरी जिम्मेदारी होती है। वे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं और अपने मंत्रालय के लिए जवाबदेह होते हैं।
राज्य मंत्री और उपमंत्री कैबिनेट की बैठकों में भाग लेते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता है। वे कैबिनेट मंत्रियों के निर्देशन में काम करते हैं।
Rolls And Responsibility
1) सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था (Supreme Decisions)
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) विभिन्न मुद्दों पर निर्णय लेती है, जैसे आर्थिक नीतियाँ, विदेशी संबंध और सुरक्षा।
2) नीति निर्माण (Policy Making Body)
मंत्रिपरिषद देश के लिए नीतियाँ और कार्यक्रम बनाती है।
3) विचार-विमर्श और निर्णय ( Supreme Executive Authority )
मंत्रिपरिषद देश को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चर्चा करती है और निर्णय लेती है।
4) कार्यकारी प्राधिकरण (Work Enforcement)
प्रत्येक मंत्री को उनके विभाग के प्रशासन की जिम्मेदारी दी जाती है।
5) मुख्य समन्वयक (Chief Coordinator )
मंत्रिपरिषद, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, सरकार के कार्यों का समन्वय करती है और राष्ट्रपति की सहायता करती है।
6)कानून बनाने में भूमिका (Law Making )
मंत्रिपरिषद विधायी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसमें मंत्री विधेयक पेश करते हैं और कानून पारित कराने में मदद करते हैं।
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7)बजट और वित्तीय मामले (Budget And Financial Matters )
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) बजट तैयार करने और वित्तीय मामलों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मंत्रिपरिषद बजट तैयार करती है और संसद में पेश करती है। इसमें सरकार की आय और खर्च का ब्यौरा होता है, जो वित्तीय वर्ष के लिए होता है।
8)विदेश नीति (Foreign Policy)
COUNCILE OF MINISTERS (मंत्री परिषद) भारत की विदेश नीति के बारे में निर्णय लेती है। यह सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है जो भारत के विदेशी संबंधों की दिशा तय करती है और आवश्यक निर्देश देती है।
